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स्टेट एग्रो दफ्तर में पाप का ताला, हथौड़े चले तो बाहर निकलीं लड़कियां

घटना के बाद रात में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा पर उठे सवाल

नाहर टाइम्स@मंगल नाहर (शाजापुर)। सरकारी कुर्सी, सरकारी दफ्तर और रात का गहरा अंधेरा…। एम.पी. स्टेट एग्रो के दफ्तर में बीती रात वो हुआ जिसने पूरे शहर में चर्चा का बाजार गर्म करके रख दिया।

सरकारी महकमों में किस कदर लापरवाही और अनैतिकता की जड़ें गहरी हो चुकी हैं, इसका जीता-जागता सबूत बुधवार रात करीब 11 बजे टंकी चौराहे पर देखने को मिला। यहां स्थित एम.पी. स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शासकीय कार्यालय में रात के अंधेरे में इश्क का खेल चल रहा था। स्थानीय लोगों की सजगता से जब पुलिस ने धावा बोला, तो ऑफिस के अंदर से दो युवतियां बरामद हुईं, जबकि उन्हें अंदर छोड़कर उनके साथी युवक बाहर से ताला लगाकर फरार हो गए।
हथौड़ों की चोट से टूटा सरकारी तिलिस्म
देर रात दफ्तर से आ रहे शोर-शराबे और संदिग्ध गतिविधियों ने आसपास के लोगों के कान खड़े कर दिए। जब लोगों ने घेराबंदी की, तो अंदर मौजूद युवक घबरा गए और युवतियों को भीतर ही कैद कर, चौनल गेट पर ताला जड़कर भाग निकले। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और डायल 112 मौके पर पहुंची। चाबी न होने के कारण पुलिस ने भारी पत्थरों और हथौड़ों का इस्तेमाल कर ताला तोड़ा। जैसे ही शटर उठा, अंदर का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी हतप्रभ रह गए।
सिस्टम को कटघरे में खड़ा करते सवाल
आधी रात को एक शासकीय कार्यालय की चाबी बाहरी युवकों के पास क्या कर रही थी? क्या विभाग के अधिकारियों को पता नहीं कि उनकी गैर-मौजूदगी में दफ्तर गेस्ट हाउस बन चुका है? महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों और संपत्ति के बीच बाहरी लड़कियों और लड़कों की मौजूदगी क्या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है?
दबाव में खाकी? साक्ष्यों के बाद भी कार्रवाई में सुस्ती
हैरानी की बात है कि रंगे हाथ पकड़े जाने और स्थानीय लोगों के चश्मदीद गवाह होने के बावजूद पुलिस इस मामले में कोई ठोस खुलासा नहीं कर रही है। जब मीडिया ने सवाल पूछे, तो जिम्मेदार भी जवाब देने के बजाय मामले को टालते दिखे। आखिर वो कौन रसूखदार हैं जिन्हें बचाने के लिए पुलिस खुद ढाल बन गई है?
जवाब कौन देगा?
फरार युवकों पर चुप्पी क्यों? जो युवक युवतियों को अंदर छोड़ ताला लगाकर भागे, क्या पुलिस ने उनकी पहचान कर ली है? या उन्हें भागने का सुरक्षित रास्ता दिया गया? रात 11 बजे सरकारी दफ्तर खोलना बिना विभाग की मिलीभगत के मुमकिन नहीं। क्या पुलिस उन भेदियों को बचा रही है? युवतियों को थाने लाने के बाद मामला जांच जारी है के नाम पर क्यों लटकाया जा रहा है? मामले में टीआई का कहना है कि कुछ कार्रवाई नही हुई। रहा सवाल फरार युवकों का तो उन्हे तलाशेंगे।
जनता की सुरक्षा और सरकारी संपत्ति की गरिमा के साथ खिलवाड़
शासकीय कार्यालय कोई धर्मशाला नहीं है कि कोई भी रात में ताला खोलकर अंदर घुस जाए। अगर पुलिस इस मामले में क्लीन चिट देने की कोशिश कर रही है, तो यह शाजापुर की जनता की सुरक्षा और सरकारी संपत्ति की गरिमा के साथ खिलवाड़ होगा।

ताला तोड़कर पुलिस ने युवतियों को बाहर निकाला।
Nahar Times News

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