जैन आराधना भवन में लगी धर्म संस्कारों की पाठशाला
संस्कार शिविर में बच्चों को मिली धर्मयुक्त जानकारियां

नाहर टाइम्स@शाजापुर। अरिहंत भगवान कौन हैं ? सिद्ध भगवंत कौन हैं ? जमीकंद और होटल में भोजन क्यों नहीं करना चाहिए ? रात्रि भोजन का त्याग किसलिए किया जाता है ? नवकार महामंत्र की क्या महिमा है ? जैसी और भी अनेक धर्मयुक्त जानकारियां, जिनकी शास्त्रयुक्त व्याख्या से जब नन्हे – मुन्ने बच्चे रूबरू हुए तो उनके बालमन की जिज्ञासाओं का स्वत: समाधान हो गया।
अवसर था, स्थानीय ओसवाल सेरी स्थित जैन उपाश्रय में आयोजित तीन दिवसीय संस्कार एवं धार्मिक शिविर का। जिसमें उपस्थित जैन समाज के बच्चों को जिन शासन की महिमा के साथ मंदिर/स्थानक के धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का प्रयत्न किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री महावीर जैन पाठशाला द्वारा नगर की सुश्राविका श्रीमती मृगावती बहन बुरड़ के विशेष मार्गदर्शन में दिनांक 2 से 4 मई तक लगने वाले उक्त तीन दिवसीय धार्मिक एवं संस्कारिक शिविर में बच्चों को धार्मिक एवं संस्कारिक शिक्षा सहित जगत पूजित जिन शासन की महिमा की संपूर्ण जानकारी दी जा रही है। साथ ही बच्चों के लिए अनेक आकर्षक गतिविधियां एवं गेम्स भी आयोजित हो रहे हैं। ताकि बच्चे खुशी-खुशी धर्म सस्कारों को ग्रहण कर सकें।
प्रभावी रहा शिविर का प्रथम दिवस
मीडिया प्रभारी मंगल नाहर ने बताया कि समाज की महिला मंडल सदस्यों श्रीमती ज्योति जैन, श्रीमती हेमा जैन, श्रीमती विनीता जैन, श्रीमती रीना धारीवाल, श्रीमती अंकिता जैन, श्रीमती बिंदू जैन एवं श्रीमती रजनी जैन के माध्यम से संचालित उक्त शिविर के प्रथम दिवस शिविर का शुभारंभ महामंत्र नवकार से हुआ। इसके पश्चात सौरभ नारेलिया ने हमारे अरिहंत भगवान के संबंध में, पंकज मांडलिक ने सिद्ध भगवंत के संबंध में, डा.पराग जैन ने रात्रि भोजन, जमींकंद के त्याग और नियमित योग-व्यायाम के संबंध में बच्चों को उपयोगी जानकारियां प्रदान की। शिविर की प्रभावना के लाभार्थी लोकेश जैन-मितांशु जैन (शक्कर वाला) परिवार रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।





